सैम हिग्गिनबाॅटम कृषि, प्रौद्योगिकी एंव विज्ञान विश्वविद्यालय (शुआट्स), प्रयागराज में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'बायो-मिलाप (2019)' का उद्घाटन प्रख्यात वैज्ञानिकों प्रोफेसर बीडी सिंह, एमेरिटस प्रोफेसर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी और प्रोफेसर कृष्णा मिश्रा, एमेरिटस प्रोफेसर, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, प्रयागराज की उपस्थिति में हुआ। सम्मेलन का आयोजन आणविक और सेलुलर इंजीनियरिंग विभाग, जैकब इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी और बायोइंजीनियरिंग, शुआट्स, प्रयागराज द्वारा किया गया। जैव प्रौद्योगिकी के छात्र श्री प्रशांत तिवारी ने बायो-मिलाप, 2019 के बारे में विस्तार से बताया और आयोजन सचिव डॉ. विजय त्रिपाठी ने स्वागत भाषण दिया, जिसके बाद संयोजक प्रो. (डॉ.) इ. जोनाथन ए. लाल, डीन, जैकब इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एंड बायोइन्जिनियरिंग ने अपने संबोधन में 'कृषि, खाद्य तकनीक और मानव स्वास्थ्य में हालिया प्रगति' पर राष्ट्रीय सम्मेलन के महत्व पर जोर देते हुए इसे एक अद्भुत सम्मेलन कहा। यह विज्ञान को जानने, उसे समझने और उसके साथ बढ़ने के लिए सीखने में हमारी निश्चित मदद करेगा।
सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि प्रो. ए.के. ए. लॉरेंस, प्रति कुलपति (शैक्षिक एवं क्वालिटी एश्योरेन्स) ने मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण में जैव प्रौद्योगिकी के विभिन्न फायदे एवं नुकसान के बारे में प्रतिभागियों को अवगत कराया। उन्होंने इस बात पर विस्तार से बताया कि जैव प्रौद्योगिकी कैसे 'रक्षा और व्यापक विनाश, दोनों के लिए एक हथियार' के रूप में प्रयोग में लायी जा सकती है। सम्मेलन के प्रशंसनीय लाभ और युवा प्रतिभागियों के मन में इसके प्रभाव को प्रो. (डॉ.) प्रमोद डब्ल्यू. रामटेके, अध्यक्ष, बायो-मिलाप, 2019 द्वारा विस्तारपूर्वक बताया गया। मुख्य अतिथि नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय, प्रयागराज के कुलपति प्रो. पी.एन. पांडे ने अपने संबोधन में, 29 अलग-अलग सम्मेलनों के बारे में श्रोताओं को बताकर मंत्रमुग्ध कर दिया, जो कि अंतर्राष्ट्रीय एकेडमी ऑफ फिजिकल साइंसेज, प्रयागराज के रजत जयंती समारोह में पूरे देश में आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने विज्ञान और गणित, इसके सहसंबंध और जैव प्रौद्योगिकी में इसके आवेदन जैसे विषयों की उत्पत्ति और आधार को भी समझाया।
उद्घाटन व्याख्यान में प्रो. बी. डी. सिंह द्वारा दिया गया एक पूर्ण व्याख्यान भी शामिल था, जिसमें 'ट्रांसजेनिक टूल्स फॉर प्लांट ब्रीडिंग' के विषय पर गहन जानकारी दी गई। उन्होंने तकनीक की नैतिकता, तटस्थता और जेनेटिकली मॉडिफाइड फूड्स (जीएमओ) और फसलों की वर्तमान स्थिति पर वक्तव्य दिया। प्रो. कृष्णा मिश्रा ने जी.एम.ओ., ड्रग डेवलपमेंट और जीन थेरेपी एवं जैव सूचना विज्ञान के महत्व और मानव माइक्रोबायोम में जैव प्रौद्योगिकी और आणविक / सेलुलर इंजीनियरिंग की प्रगति पर विस्तार से बताया। उद्घाटन सत्र, सम्मेलन के स्मृति चिन्ह और स्मारिका द्वारा विशिष्ट अतिथियों को सम्मान के साथ संपन्न हुआ।
शुआट्स में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'बायोमिलाप' प्रारम्भ